
कौशांबी :प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बैरमपुर सेंगरहा की लचर व्यवस्था को लेकर भारतीय किसान यूनियन महात्मा टिकैत ने मोर्चा खोल दिया है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर 7 दिन के अंदर अस्पताल में डॉक्टर की नियमित तैनाती, सफाई और मरीजों से शालीन व्यवहार सुनिश्चित नहीं हुआ तो मरीजों व परिजनों के साथ सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
भाकियू पदाधिकारियों का आरोप है कि PHC बैरमपुर में तैनात डॉक्टर अंबुज कुमार सप्ताह में केवल रविवार को हस्ताक्षर करने आते हैं। मरीजों को डॉक्टर कभी नहीं देखते। पूरा अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। नतीजा ये कि बुखार, खांसी जैसी छोटी बीमारी के लिए भी मरीजों को 20-25 KM दूर जिला अस्पताल भागना पड़ रहा है।
किसान नेताओं ने PHC में तैनात लैब टेक्नीशियन सूर्यभान सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कोई भी मरीज डॉक्टर के बारे में पूछता है तो सूर्यभान सिंह भड़क जाते हैं और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। कई मरीजों को तो “बाहर चले जाओ” तक कह दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्टाफ का रवैया ही मरीजों को अस्पताल आने से रोक रहा है।
मरीजों के परिजनों ने बताया कि PHC परिसर में कचरे और गंदगी का ढेर लगा है। सफाईकर्मी नियमित नहीं आते। वार्ड और प्रसव कक्ष में भी बदबू रहती है। ऐसे में यहां इलाज कराने वाले मरीजों को संक्रमण का खतरा बना रहता है।
भाकियू महात्मा टिकैत के जिलाध्यक्ष ने कहा: “सरकार गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन बैरमपुर PHC में मरीज भगवान के भरोसे हैं। डॉक्टर नहीं, लैब टेक्नीशियन की मनमानी और गंदगी है। अगर 7 दिन में डॉक्टर की ड्यूटी तय नहीं हुई और सूर्यभान सिंह का रवैया नहीं सुधरा तो हम मरीजों के साथ PHC पर ताला जड़कर धरना देंगे।”
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कौशांबी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन अभी उनका कोई आधिकारिक बयान नहीं मिल सका। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार हर PHC में तैनात डॉक्टर को शिफ्ट के अनुसार ओपीडी देखना अनिवार्य है। स्टाफ का दायित्व मरीजों से सम्मानजनक व्यवहार करना है।
सीएमओ कार्यालय ने कहा कि लिखित शिकायत मिलने पर जांच टीम भेजी जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। मरीज 1800-180-5145 पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।