
कौशाम्बी। करारी थाना क्षेत्र के नेवारी गांव निवासी महिला गुलिशमा ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। महिला का आरोप है कि न्याय मांगने थाने पहुंची तो उनकी बात सुने बिना ही मामले को “आपसी सहमति” बताकर निपटा दिया गया।पीड़िता गुलिशमा के अनुसार वह पति से अलग रह रही हैं। 2 दिन पहले ननद और नंदोई उनके कमरे में जबरन घुस आए। आरोप है कि दोनों ने कमरे में तोड़फोड़ की, सामान फेंका, मोबाइल फोन तोड़ दिया और जान से मारने की धमकी भी दी। महिला का कहना है कि इस दौरान उनके साथ मारपीट भी हुई और गाली-गलौज की गई।
गुलिशमा ने बताया कि घटना के बाद वह न्याय की गुहार लेकर करारी थाने पहुंचीं। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात सिपाही धीरज सिंह ने उनका पक्ष सुने बिना विपक्षी पक्ष का साथ दिया और डांट-फटकार कर घर वापस भेज दिया।
नेवारी गांव की महिला गुलिशमा ने थाने में दी शिकायत
पति से अलग रह रही महिला के कमरे में घुसे ननद-नंदोई
सामान फेंका, मोबाइल तोड़ा, जान से मारने की धमकी दी
कौशांबी करारी थाने न्याय के लिए पहुंची महिला तो थाने में तैनात सिपाही धीरज सिंह ने विपक्षी से मिल करके उसी का साथ देने लगा महिला को डांट फटकार कर घर भेज दिया थाने वाले ने रिपोर्ट लगाया आपसी सहमति हो गई लेकिन महिला का कहना है कोई आपसी सहमति नहीं हुई थी मैंने बोला मेरे पेट में लात मारा गया मुझे गाली दी गई थाने वालों ने एक मेरी नहीं सुनी उल्टा ही सुला समझौता की रिपोर्ट लगा दी गई महिला कहना है मुझे न्याय ना मिला तो मैं आत्महत्या कर लूंगी उसके जिम्मेदार धीरज सिंह और मेरे साथ जेठ ननंद नंदोई होंगे मैं बहुत परेशान हो चुकी हूं आप थाने में भी मेरी कोई सुनाई नहीं हुई
महिला का सबसे बड़ा आरोप ये है कि थाने में उनकी मर्जी के खिलाफ “आपसी सहमति से समझौता हो गया” की रिपोर्ट बना दी गई। गुलिशमा का कहना है कि न तो कोई समझौता हुआ और न ही उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया गया। “मैंने बताया कि मेरे पेट में लात मारी गई, गाली दी गई, लेकिन थाने वालों ने एक नहीं सुनी” – गुलिशमा ने कहा।
इस पूरे घटनाक्रम से परेशान गुलिशमा ने बताया कि थाने में भी उनकी सुनवाई नहीं हुई। महिला ने कहा कि वह इस मामले को लेकर काफी तनाव में हैं।
*महिलाओं के लिए कानूनी विकल्प*
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी महिला की FIR सही से दर्ज नहीं होती या पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो वह:
1. *पुलिस अधीक्षक, कौशांबी* को लिखित शिकायत दे सकती हैं
2. *डायल 112* पर कॉल कर तत्काल मदद मांग सकती हैं
3. *महिला हेल्पलाइन 181* पर 24×7 सहायता ले सकती हैं
4. कोर्ट में *CrPC धारा 156(3)* के तहत प्रार्थना पत्र देकर FIR दर्ज कराने का आदेश ले सकती हैं