
कौशाम्बी :जिले की यातायात व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि यातायात पुलिस बाइक चालकों की फोटो खींचकर ऑनलाइन चालान काटकर ‘वीरता’ दिखा रही है, जबकि सड़कों पर 8000 से अधिक विक्रम, ऑटो, सीएनजी, अप्पे बिना कार्रवाई के दौड़ रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक जिले भर में चलने वाले लगभग 8000 विक्रम, ऑटो, सीएनजी और अप्पे चालकों से हर महीने ₹300 से ₹500 तक ‘वर्दी के नाम पर वसूली’ हो रही है। वसूली के चलते ओवरलोड सवारी, बिना लाइसेंस ड्राइविंग और गलत पार्किंग जैसे गुनाहों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
आरोप है कि पूरे दिन सड़कों पर बाइक सवारों की फोटो खींचकर ऑनलाइन चालान काटना ही यातायात पुलिस का मुख्य काम बन गया है। जबकि कस्बे-बाजार में विक्रम-ऑटो बीच सड़क पर आड़े-तिरछे खड़े होकर जाम लगाते हैं, ओवरलोड सवारी भरते हैं, तेज रफ्तार में दौड़ते हैं।मंझनपुर-इलाहाबाद मार्ग पर सरकार द्वारा प्रतिबंधित 30 प्राइवेट बसें बिना परमिट के रोज 3 चक्कर लगा रही हैं। 10 हजार से अधिक बिना परमिट के ट्रैक्टर-ट्रालियां ₹3000 महीने ‘एंट्री’ देकर ओवरलोड बालू लेकर दौड़ रही हैं। हजारों ट्रक-डंपर भी ओवरलोड बालू से भरे सड़कों पर हैं। इन पर यातायात पुलिस की कार्रवाई न के बराबर है।विक्रम-ऑटो का आतंक: बिना लाइसेंस चालक, ओवरलोड, गलत पार्किंग से पूरे जिले के बाजार-चौराहे जाम की चपेट में हैं। तेज रफ्तार ऑटो-विक्रम रोज हादसों का कारण बन रहे हैं, लेकिन उनके ‘गुनाह माफ’ हैं।जब कभी अफसरों का सख्त निर्देश आता है तो औपचारिकता के लिए कुछ गिनती के चालान कर वसूली पर पर्दा डाल दिया जाता है। यातायात निरीक्षक के कारनामों की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है।