सीता हरण की लीला का मंचन देख भाव-विभोर हुए दर्शक

कौशाम्बी संदेश आर्या शुक्ला

कौशाम्बी। दारानगर – 245 वें ऐतिहासिक रामलीला में श्री रामलीला कमेटी दारानगर के तत्वाधान में ब्राह्मण टोला के सीता हरण स्थल पर हुई

।जिसमें भगवान राम की कुटिया के सामने सोने के मृग के रूप रखकर विचरण करने लगा यह देखकर सीता जी सोने के हिरन की मृगछाला लेने के लिए प्रभु से कहती हैं कि स्वामी देखिए कितना सुंदर मृग है ।मुझे इस मृग की छाल चाहिए यह सुनकर प्रभु श्री राम हिरण की मृगछाला को लेने के लिए हिरण के पीछे धनुष बाण लेकर के चल देते।इस प्रकार से हिरण प्रभु श्री राम को बहुत दूर तक जंगल में ले जाता है ,अंत में प्रभु श्री राम जी ने अपने बाण से मृग को जैसे मारते हैं तो मारीच अपने रूप में आकर के हाय लक्ष्मण हाय लक्ष्मण कर चिल्लाता है जिसके ध्वनि को सुनकर यहां पर्णकुटी में माता जानकी विचलित हो जाती है और लक्ष्मण से कहती हैं कि हे लक्ष्मण तुम्हारे भाई आज संकट में है जाकर के उनकी मदद करो लक्ष्मण जी सुनकर बड़े आश्चर्यचकित हो जाते हैं और माता जी को समझाते हैं की है माता प्रभु श्री राम के ऊपर किसी प्रकार का कष्ट नहीं आ सकता आप निश्चिंत रहें ऐसी कोई बात नहीं है परंतु सीता जी के जिद करने पर लक्ष्मण जी सीता जी के को कुटिया में छोड़कर और एक रेखा खींच करके चले जाते हैं। जहां रावण साधु का रूप रख करके माता सीता के कुटी में आता है और भिक्षा मांगता है, जैसे ही कुटिया के सामने पैर रखता है तो आग लग जाती है, यह देखकर रावण बहुत परेशान हो जाता है तो वह माता सीता से कहता है कि मैं बंधी हुई भिक्षा नहीं लूंगा क्योंकि रावण बहुत विद्वान था उसे पता हो गया था कि यहां पर लक्ष्मण रेखा खींची गई है जिस कारण वह कुटिया में प्रवेश नहीं कर सकता जैसे ही माता सीता उसे भिक्षा देने के लिए लक्ष्मण रेखा को पार करती हैं दुष्ट रावण माता सीता का हरण कर लेता है रास्ते में उसका गिद्धराज जटायु ने जैसे ही सीता जी के विलाप को सुनकर रावण से कहता है कि है रावण रुक जा कहां जा रहा है और सीता को लेकर के जा रहा है गिद्धराज़ जटायु रोकता है और रावण को अपनी चोंच से व्याकुल कर देता है लेकिन रावण अपनी चंद्रहास तलवार से उसके पंख को काटकर जमीन पर गिरा देता है और सीता जी को लेकर के लंका की ओर चला जाता है।रास्ते में सीता जी विलाप करती हुई जाती है तो ऋष्यमूक पर्वत के नीचे कुछ बंदर को बैठे देखती है तो वहां अपने कुछ गहने गिरा देती हैं, लंका का राजा रावण सीता जी को लेकर के लंका पुरी चला जाता है।अष्टमी की लीला में मारीच का वध, सीता हरण और जटायु रावण के युद्ध,सुग्रीव राम मिलन, बाली सुग्रीव युद्ध का चौपाई के माध्यम से श्री रामलीला कमेटी के मुख्य पुरोहित चंद्रिका प्रसाद मिश्र के साथ पंडित नील कमल मिश्र एवम पंडित रेवती रमण पांडेय ने अपने पूर्वजों के परिपाटी द्वारा रचित चौपाइयों के माध्यम से बड़े मनोहर दृश्य के साथ सजीव लीला संपन्न कराई।श्री राम लीला कमेटी के महामंत्री योगेंद्र मिश्र ने बताया कि कल लंका दहन की लीला म्योहरा में होगी।

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