मुकुट पूजन और ‘नारद मोह’ लीला से सराय अक़िल की ऐतिहासिक रामलीला का भव्य शुभारंभ

मुकुट पूजन और ‘नारद मोह’ लीला से सराय अक़िल की ऐतिहासिक रामलीला का भव्य शुभारंभ

कौशांबी संदेश पारस अग्रहरि पत्रकार

कौशांबी: सराय अक़िल कस्बे की ऐतिहासिक रामलीला का विधिवत शुभारंभ शुक्रवार की रात को मुकुट पूजन के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुए इस पूजन में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और रावण के मुकुटों का पूजन कर मंचन की शुरुआत की गई। इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष गोपालजी केसरवानी ने अन्य पदाधिकारियों संग मुकुट पूजन किया।

मुकुट पूजन के साथ दर्शकों को ‘नारद मोह’ लीला का अद्भुत प्रसंग देखने को मिला। नारद मुनि, जिन्हें उनके तप और ज्ञान के लिए जाना जाता है, भगवान विष्णु के परम भक्त हैं। लेकिन इस लीला में उनका अहंकार दिखाया जाता है, जब वे खुद को तपस्या में सर्वोत्तम मानने लगते हैं। भगवान विष्णु उनकी इस भावना को समाप्त करने के लिए मोहिनी रूप धारण करते हैं और उन्हें सांसारिक मोह में उलझाकर उनकी परीक्षा लेते हैं। इस प्रसंग में नारद मोह को पराजित होते हुए दिखाया गया, जिससे यह संदेश मिलता है कि अहंकार व्यक्ति को ईश्वर से दूर कर देता है।
लीला में नारद मुनि की भूमिका को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शक भाव-विभोर हो गए। ‘नारद मोह’ प्रसंग न केवल मनोरंजन का साधन रहा, बल्कि उसमें धार्मिक और नैतिक शिक्षा भी छिपी थी, जो हर उम्र के दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ गया।
रामलीला का मंचन 4 अक्तूबर से 16 अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें बांदा, फतेहपुर, चित्रकूट, कानपुर और महोबा से आए कलाकारों द्वारा श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, दशरथ, रावण, ताड़का आदि के पात्रों का जीवंत अभिनय किया जाएगा। सराय अक़िल की यह रामलीला अपनी ऐतिहासिक परंपरा और भव्यता के लिए जानी जाती है, जो 1931 में ब्रिटिश काल के दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष ठाकुर शिवसेवक सिंह द्वारा आरंभ की गई थी। तब से यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपरा की धरोहर भी है।

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