सराय अक़िल कस्बे की ऐतिहासिक रामलीला का ध्वजारोहण, चार अक्तूबर से होगा शुभारंभ

सराय अक़िल कस्बे की ऐतिहासिक रामलीला का ध्वजारोहण, चार अक्तूबर से होगा शुभारंभ

कौशांम्बी संदेश पारस अग्रहरि

कौशाम्बी। सराय अक़िल कस्बे की प्राचीन रामलीला, जो ब्रिटिश काल की धरोहर मानी जाती है, का भूमिपूजन इस सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। यह विधि आचार्य गिरीश चंद्र पांडेय के नेतृत्व में संपन्न हुई, जिसमें रामलीला कमेटी के अध्यक्ष गोपालजी केसरवानी ने अन्य पदाधिकारियों संग ध्वजा और भूमि पूजन किया।

यह महाकाव्यात्मक रामलीला 4 अक्तूबर से 16 अक्तूबर तक होगी, जिसमें बांदा, फतेहपुर, चित्रकूट, कानपुर, और महोबा से आए कलाकार श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, दशरथ, रावण व ताड़का का जीवंत अभिनय करेंगे। रामलीला की यह गौरवशाली परंपरा सन 1931 में ब्रिटिश शासन के दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष ठाकुर शिवसेवक सिंह द्वारा शुरू की गई थी। उस समय से लेकर आज तक, रामलीला के मंचन से पूर्व ठाकुर शिवसेवक सिंह के साथ भगवान राम के जयकारे लगते हैं, जिससे यह आयोजन एक ऐतिहासिक महत्व धारण करता है। रामलीला के मंचन को देखने के लिए कस्बे सहित बसुहार, इछना, बरई, खोंपा, घोसिया, बिरनेर, सुरसेनी, चित्तापुर, भगवानपुर बहुंगरा जैसे निकटवर्ती गांवों से हजारों की संख्या में दर्शक आते हैं। इस वर्ष भी आयोजन की तैयारी जोरों पर है, जिसमें कमेटी के महामंत्री अनिल केसरवानी, कोषाध्यक्ष शंकरलाल, स्टेज प्रबंधक संतोष सोनी, नितिन केसरवानी और निखिल केसरवानी समेत कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे

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