
कौशांबी। संवाददाता: राहुल यादव |
करारी थाना क्षेत्र इन दिनों विवादों में घिरता नजर आ रहा है। आरोप है कि थाना परिसर को ‘जेल कारागार’ में तब्दील कर दिया गया है, जहां नागरिकों के मौलिक और मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
ताजा मामला बंधूरी रसूली गांव का है, जहां के एक युवक को 26 जुलाई से हिरासत में रखे जाने की सूचना सामने आई है। पीड़ित के परिजनों का आरोप है कि युवक को थाना करारी में अवैध रूप से 24 घंटे से अधिक समय से बिना किसी विधिक कार्यवाही के रखा गया है और पुलिस द्वारा चलान न करते हुए पैसों की मांग की जा रही है।
परिजनों ने इस मामले की शिकायत जिले के पुलिस अधीक्षक से की है। यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी करारी थाने पर गैरकानूनी गिरफ्तारी, अरेस्ट मेमो न भरना, और आम नागरिकों को कई दिनों तक अवैध हिरासत में रखने जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
6 मार्च का मामला भी फिर उठा चर्चा में
ज्ञात हो कि 6 मार्च को एक GPS लोकेशन के साथ वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें करारी थाना परिसर में रमेश मौर्य को कई दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखने का दावा किया गया था। इस मामले में सदर सीओ को जांच सौंपी गई थी, लेकिन आज तक वह जांच कागज़ों तक ही सीमित नजर आती है।
क्या कहती है तकनीकी जांच की मांग?
विधि विशेषज्ञों और स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि यदि करारी थाना परिसर के CCTV फुटेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो अवैध हिरासत और अधिकार हनन की सच्चाई सामने आ सकती है।
पुलिसिया कार्यशैली पर उठे सवाल
यह मामला पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और उच्चाधिकारियों की निगरानी प्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है। यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं और थाने के भीतर चल रही कथित अवैध गतिविधियों पर बड़ा पर्दाफाश हो सकता है।
Author: Kaushambi Sandesh
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