
कौशाम्बी! 14 जून को पूरी दुनिया “विश्व रक्तदाता दिवस” मना रही है। इसी अवसर पर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, कौशांबी में आज भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक कौशांबी सत्यनारायण ने फीता काटकर किया। SP के साथ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और तमाम चिकित्साधिकारीगण मौजूद रहे। कार्यक्रम का मकसद युवाओं को “स्वैच्छिक रक्तदान” के लिए प्रेरित करना और “एक रक्तदान – तीन जिंदगी” का संदेश देना था।फीता काटने के बाद SP सत्यनारायण ने मंच से कहा कि “आज के दिन हम उन सभी रक्तदाताओं को सलाम करते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के अपना रक्त देकर किसी की जिंदगी बचाते हैं। पुलिस की वर्दी भी इंसानियत की वर्दी है। जब जरूरत पड़े तो हर पुलिसकर्मी रक्तदान के लिए तैयार रहता है”।
उन्होंने युवाओं से अपील की: “18 से 65 साल की उम्र का हर स्वस्थ व्यक्ति साल में 3-4 बार रक्तदान कर सकता है। इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि नए ब्लड सेल्स बनते हैं। डरो मत, रक्तदान करो। एक यूनिट खून 3 लोगों की जान बचा सकता है”।
SP ने खुद मेडिकल स्टाफ से कहा कि वो भी रक्तदान करेंगे और पुलिस लाइन के जवानों को भी प्रेरित करेंगे।
शिविर में MBBS छात्रों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ब्लड बैंक की टीम ने सभी डोनर्स का पहले ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन और वजन चेक किया, फिर रक्त लिया।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने बताया कि “विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े कहते हैं कि भारत में हर साल 1.5 करोड़ यूनिट खून की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 1 करोड़ यूनिट ही डोनेशन से मिल पाता है। इस 50 लाख यूनिट की कमी को स्वैच्छिक रक्तदाता ही पूरा कर सकते हैं”।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि “थैलेसीमिया, सिकल सेल, सड़क हादसे, डिलीवरी केस में खून की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है। गर्मियों में डोनेशन कम हो जाता है, इसलिए आज का शिविर बहुत जरूरी था”।
शिविर के दौरान मेडिकल कॉलेज के चिकित्साधिकारीगण पूरी टीम के साथ मौजूद रहे। उन्होंने रक्तदाताओं को रक्तदान के बाद जूस, फल और ग्लूकोज दिया। हर डोनर को “रक्तदाता प्रमाण पत्र” और WHO की थीम वाला बैज भी दिया गया।
डॉक्टरों ने बताया कि रक्तदान के 24 घंटे बाद शरीर में खून की कमी पूरी हो जाती है। 56 दिन बाद दोबारा डोनेट कर सकते हैं।
आज के शिविर से कौशांबी के ब्लड बैंक में 100+ यूनिट खून जमा होने की उम्मीद है। प्रशासन ने तय किया है कि हर महीने मेडिकल कॉलेज में एक छोटा रक्तदान शिविर लगेगा ताकि ब्लड बैंक हमेशा फुल रहे।
DM कौशांबी ने भी संदेश भेजा कि “रक्तदान एक सामाजिक जिम्मेदारी है। मैं सभी सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, ग्राम प्रधानों से अपील करता हूं कि वो अपने क्षेत्र में रक्तदान शिविर लगवाएं”।
इस साल WHO की थीम है: “Give blood, give hope: together we save lives” यानी “रक्त दो, आशा दो: मिलकर हम जानें बचाते हैं”।
WHO का कहना है कि 2026 तक हर देश को 100% स्वैच्छिक रक्तदान पर लाना है। पैसे लेकर खून बेचना अपराध है।