
कौशाम्बी संदेश अमित कुशवाहा
कौशाम्बी जिले के ग्राम सभा मलाक भायल मजरा करेटी में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम कटने का मामला अब गंभीर जांच का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कई ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जो न केवल जीवित हैं बल्कि गांव में स्थायी रूप से निवास भी कर रहे हैं।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्राथमिक जिम्मेदारी बीएलओ (Booth Level Officer) की होती है। नियमों के अनुसार बीएलओ को घर-घर जाकर सत्यापन करना अनिवार्य होता है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई है और क्या दर्शाकर वोटर लिस्ट से नाम काट दिए गए।
सूत्रों के मुताबिक, न तो सही ढंग से सर्वे किया गया और न ही सत्यापन रिपोर्ट समय पर और सही रूप में प्रस्तुत की गई। इससे यह आशंका और गहराती है कि बीएलओ की कार्यशैली में गंभीर चूक हुई है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सीधे तौर पर मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि क्या बीएलओ की लापरवाही के चलते वोटर लिस्ट से नाम काटे गए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई और गलत तरीके से कटे नामों को तत्काल बहाल किया जाए।
फिलहाल यह मामला जिला निर्वाचन प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाते हैं और आम मतदाताओं को उनका अधिकार वापस कब तक मिलता है।
