
स्वच्छता मिशन की हकीकत कागजों तक सीमित, ग्रामीणों को जलभराव की परेशानी
कौशांबी। मूरतगंज ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम मितवापुर में ग्राम प्रधान के विकास कार्यों की हकीकत धरातल पर कुछ और ही बयां कर रही है। जहां एक ओर सरकार स्वच्छता अभियान पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस गांव में आज तक नाली निर्माण तक नहीं हो सका है। परिणामस्वरूप, घरों का गंदा पानी रास्तों पर बह रहा है और लगातार जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्राम प्रधान का पहला कार्यकाल पूरा हो चुका है और अब वे दूसरे कार्यकाल में भी सक्रिय हैं, लेकिन विकास कार्यों का कहीं कोई अता-पता नहीं है। नाली, जलनिकासी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जबकि उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी ग्राम या नगर पंचायत में जलभराव की स्थिति नहीं होनी चाहिए, लेकिन मितवापुर गांव में प्रशासनिक लापरवाही और स्थानीय प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते हालात जस के तस हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छता मिशन के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन उन पैसों का उपयोग धरातल पर नजर नहीं आता। विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं।
अब सवाल यह उठता है कि क्या मितवापुर जैसे गांवों में भी कभी वास्तविक विकास होगा या फिर यह ढिंढोरा सिर्फ रिपोर्टों और भाषणों तक ही सीमित रहेगा? ग्रामीणों ने जांच की मांग करते हुए शासन-प्रशासन से अपील की है कि मितवापुर गांव में हुए कथित विकास कार्यों की जमीनी जांच कराई जाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।
Author: Kaushambi Sandesh
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