टूटा धनुष, गरजे परशु राम…उठहु राम भंजहु भव चापा, मेटहु तात जनक परितापा

टूटा धनुष, गरजे परशु राम…उठहु राम भंजहु भव चापा, मेटहु तात जनक परितापा

कौशाम्बी संदेश

कौशाम्बी। मुख्यालय स्थित हिन्दु धर्म सभा श्री रामलीला कमेटी के द्वारा धनुष यज्ञ लीला का शुभारंभ उस समय से होता है जब राजा जनक द्वारा स्वयंवर आयोजित किया जाता है। कई राजा समारोह में मौजूद होते हैं।

राजा जनक की शर्त के अनुसार सभी राजा शिवजी का धनुष तोड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई भी तोड़ना तो दूर धनुष को उठा भी नहीं पाता। इससे राजा जनक मायूस हो जाते हैं। मंझनपुर रामलीला मैदान में धनुष यज्ञ लीला का मंचन किया गया। अंतिम दिवस मिथिला नरेश जनक के कठोर प्रण के मुताबिक देश-विदेश आए भिन्न-भिन्न राजा और महारथियों ने धनुष भंग करने की जोर आजमाइश की लेकिन भगवान शिव के अजगव को उठाने का पूर्ण प्रयास किया लेकिन कोई भी बाहुबली राजा शिव धनुष को टस से मस तक न कर सका। इस बीच दर्शकों को आनंद बहुत आया। इसी बीच लंका नरेश रावण और पाताल लोक के राजा बाणासुर ने पहुंचकर धनुष यज्ञ को अपने द्वारा पूर्ण करने की बात रखी। जिस पर बाणासुर क्रोधित हो उठा और रावण बाणासुर में काफी तीखी बहस हुई। अंत में रावण ने धनुष का खंडन का प्रयास किया तो देवताओं ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। लेकिन जाते-जाते उसने एक प्रण जरूर लिया कि एक दिन वह लंका में सीता को अवश्य ले जाएगा। इस पर राजा जनक कहते हैं कि लगता है कि यह धरती वीरों से खाली हो गई है। राजा जनक की यह बात लक्ष्मण जी को काफी नागवार लगती है। वह राजा जनक से कुछ कहने को होते है, लेकिन भगवान श्रीराम उन्हें शांत होने का इशारा कर देते हैं। मुनि विश्वामित्र राम को आदेश देते है। ‘‘उठहु राम भंजहु भव चापा, मेटहु तात जनक परितापा‘‘ गुरु विश्वामित्र जनक जी को बेहद परेशान और निराश देखकर श्री राम जी से कहते हैं कि हे पुत्र श्री राम उठो और भव सागर रुपी इस धनुष को तोड़कर, जनक की पीड़ा का हरण करो। मुनि की आज्ञा पाकर प्रभु राम एक ही झटके में अपने कर कमलों से धनुष को उठा लेते है। प्रत्यंचा चढ़ाते ही शिव धनुष पलक झपकते ही दो टुकड़ों में विभक्त हो जाता है। सीता-श्रीराम के गले में वरमाला डाल देती हैं। पूरी जनकपुरी में खुशी का माहौल बन जाता है। यहीं पर सीता स्वयंवर लीला का समापन हो जाता है। धनुष टूटने की गरजना सुन परशुराम कुपित भाव में मिथिला आ धमकते है। परशुराम के क्रोध में लक्ष्मण के तीखे वचन आग में घी का काम करते हैं। इसी बीच लक्ष्मण परशुराम के बीच तीखा संवाद शुरू हो जाता है। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आशीष केसरवानी उर्फ बच्चा, महामंत्री पंकज गामा, पंकज शर्मा, उपाध्यक्ष ज्ञानचन्द्र गुप्ता, झल्लर चौरासिया, रिकू, रोहित गुप्ता, सुनील, सोने लाल, अजय वर्मा, सुशील केसरवानी, सुशील श्रीवास्तव, चट्टू भाई, सहित रामलीला कमेटी के पदाधिकारी एवं आस-पास क्षेत्र के लोग मौजूद रहें। रोहित गुप्ता ने बताया कि शनिवार को राम बारात निकाली जायेगी, बारात में शामिल होने के लिए आग्रह किया है। राम बारात एवं राम विवाह लीला का मंचन किया जायेगा।

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