*कहती हैं ये फ़ातिमा हाय इमामे हसन*
*करारी स्थित मरहूम चौधरी कादिर अली के इमामबाड़े में आयोजित हुई मजलिस,बरामद हुआ इमाम हसन का ताबूत*
कौशाम्बी संदेश राहुल यादव
*कौशाम्बी–*
करारी कस्बे में वफाते रसूले अकरम और इमाम हसन की शहादत के मौक़े पर मजलिस का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत कुरान की तेलावत से की गई। मौलाना अलमदार हसनैन रिजवी ने मजलिस पढ़ी, मजलिस के बाद इमाम हसन का ताबूत बरामद हुआ। नौजवानों ने नौहाख्वानी और सीना जनी कर अपने इमाम को याद किया।
मंगलवार को माहे सफर की २८ तारीख इस्लामी तारीख में बहुत महत्व रखती है। यही वह तारीख है कि जिसमें हमारे आखिरी नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफा(स) और इमामे हसन अलैहिस्सलाम की शहादत हुई थी। उसी की याद में सुबह चमनगंज वार्ड स्थित मरहूम चौधरी कादिर अली के इमामबाड़े में आयोजित की गई। तेलावते कुरआन ए पाक से मजलिस की शुरुआत हुई। इसके बाद मौलाना सैयद अलमदार हसनैन रिजवी ने मजलिस को खेताब करते हुए कहा कि इमाम हसन को उनकी ज़ौजा ने हुकूमते वक़्त की मिली भगत से उन्हें जहर दे कर शहीद कर दिया गया। जब आपका जनाज़ा घर वाले लेकर मस्जिदे नबवी की तरफ चले तो हुकूमत के लोगों ने तीर चला कर इमाम हसन के जनाजे को मस्जिदे नबवी में दफ्न होने से रोक दिया। इतना सुन कर अजादारों की आखों से आंसू निकल पड़े। ताबुते इमाम हसन बरामद हुआ। अजादारों ने ताबूत की ज़्यारत की। पहला नौहा नैयर रिजवी ने पढ़ा– कहती थी ये फातमा हाय इमामे हसन–हाय मेरे दिलरूबा हाय इमामे हसन। इस नौहे पर नौजवानों ने मातम कर बीबी फातमा जहरा को पुरसा पेश किया। दूसरा नौहा नजफी ने पढ़ा–सम हसन को पिलाया जाता है, गम का एक अब्र छाया जाता है। नौहे के बाद मौलवी तस्वीर ने ज्यारत पढ़ा कार्यक्रम को समाप्त किया।
