
कब्जे से जल निकासी बाधित, सड़कें हो रहीं खराब
खबर प्रकाशित होने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, ग्रामीणों में आक्रोश
कौशांबी। सिराथू तहसील क्षेत्र के ग्राम मलाक भायल करेटी में सरकारी तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 265 स्पष्ट रूप से सरकारी जलमग्न (तालाब) भूमि के रूप में दर्ज है, इसके बावजूद दबंगों द्वारा खुलेआम कब्जा किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि एसडीएम, लेखपाल और कानूनगो सब कुछ जानते हुए भी मौन साधे हुए हैं।ग्रामीणों के अनुसार सतीश पुत्र रामभवन द्वारा तालाब की भूमि पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। इस संबंध में कई बार लेखपाल और कानूनगो को सूचना दी गई, लेकिन अब तक न तो मौके पर कोई कार्रवाई की गई और न ही कब्जा हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व कर्मचारियों की चुप्पी भूमाफियाओं को प्रशासनिक संरक्षण का संकेत दे रही है।तालाब पर हो रहे अवैध कब्जे का असर अब गांव की जल निकासी व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। तालाब पाटे जाने से बरसात और नालियों का पानी नहीं निकल पा रहा, जिसके कारण गांव की सड़कें खराब हो रही हैं और लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही जल संरक्षण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट की आशंका बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर पहले भी खबर प्रकाशित हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया। इससे लोगों में गहरा आक्रोश है और वे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सरकारी तालाब को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए, भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और लापरवाही बरतने वाले लेखपाल, कानूनगो समेत जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते सरकारी तालाब को बचाने के लिए कदम उठाएगा, या फिर राजस्व अमले की चुप्पी में भूमाफियाओं का कब्जा स्थायी रूप ले लेगा?
