
कौशांबी। आज दिनांक 26 सितंबर 2025 को यूपीडास्प नमामि गंगे जैविक खेती योजना के अंतर्गत विकासखण्ड कड़ा सिराथू एवं मूरतगंज के विभिन्न ग्रामों में निर्धारित रोस्टर प्लान के अनुसार किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में कृषक और लाभार्थी उत्साहपूर्वक शामिल हुए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के महत्व, तकनीकी विधियों तथा इसके दीर्घकालिक लाभों से अवगत कराना रहा। विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान बीजामृत, जीवामृत, दशपर्णी अर्क, पंचगव्य और घनजीवामृत जैसे जैविक संसाधनों के निर्माण की विधि और उनके सही प्रयोग के तरीकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
किसानों को बताया गया कि इन जैविक संसाधनों के प्रयोग से न केवल खेती की लागत में भारी कमी आती है, बल्कि फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। साथ ही, मिट्टी की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है और भूमि में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा लगातार बढ़ती है।
कार्यक्रम के दौरान जिला प्रभारी श्री मेहंदी हसन ने कहा कि,
> “जैविक खेती न केवल मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखती है बल्कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग को भी कम करती है। इससे किसानों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ा योगदान मिलता है। साथ ही, गंगा नदी की स्वच्छता अभियान में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि जैविक पद्धति अपनाने से किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा दे सकते हैं।
प्रशिक्षण सत्र में जिला प्रभारी के साथ सभी एल.आर.पी. (लोकल रिसोर्स पर्सन) भी मौजूद रहे। उन्होंने किसानों को प्रायोगिक प्रशिक्षण देकर जैविक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
Author: Kaushambi Sandesh
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