
जनपद कौशाम्बी शासनादेश के स्पष्ट निर्देश हैं कि सस्ते गल्ले की दुकान का आवंटन स्वयं सहायता समूह की सक्रिय व पुराने सदस्यों को वरीयता देते हुए किया जाना चाहिए। लेकिन 4 सितंबर 2025 को किया गया आवंटन न केवल मानकों के विपरीत है बल्कि पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाल ही में मात्र दो माह पूर्व समूह में जोड़ी गई महिला के नाम पर सस्ते गल्ले की दुकान का आवंटन कर दिया गया, जबकि पुराने और सक्रिय सदस्यों की अनदेखी की गई। इस प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूह जय मां लक्ष्मी और जय साक्षी आजीविका समूह के सदस्यों ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि राधा देवी पत्नी जयसिंह प्रजापति, जो वर्तमान ग्राम प्रधान की सगी भाभी हैं, और मनीषा देवी यादव पत्नी विनोद सिंह द्वारा आवेदन किए जाने के बावजूद उन्हें दरकिनार किया गया।
ग्रामीणों का मानना है कि यह आवंटन पूरी तरह से निराधार, गलत और शासनादेश के मानकों के विपरीत है। इससे यह साफ झलकता है कि पात्र लाभार्थियों की अनदेखी कर पक्षपातपूर्ण तरीके से दुकान का आवंटन किया गया। ग्रामीणों ने इस निर्णय के खिलाफ आक्रोश जताते हुए आवंटन को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि न्यायहित में उक्त प्रस्तावित आवंटन को रद्द कर, शासनादेश के अनुसार मानकों को पूरा करते हुए नया प्रस्ताव पारित किया जाए और वास्तविक पात्र लाभार्थियों को ही सस्ते गल्ले की दुकान का लाभ दिया जाए। ऐसा होने से ही ग्रामीणों का विश्वास प्रशासन पर कायम रह सकेगा और शासन की मंशा पूर्ण हो पाएगी।
Author: Kaushambi Sandesh
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