वक्फ की जमीन हड़पने की हो रही है कोशिश-पूर्व सांसद

कौशाम्बी संदेश

कौशाम्बी। करारी मदरसा में दस्तारबंदी का किया गया आयोजन
कौशांबी संदेश राहुल यादव
करारी,कौशाम्बी। करारी कस्बा स्थित मदरसा जामिया इमदादुल उलूम में मंगलवार को दस्तारबंदी के जलसे का आयोजन शेख अबू सईद के संरक्षण में व मौलाना मोहम्मद इमरान हबीबी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। जलसे का संचालन साहिद फर्रुखाबादी ने किया। जलसे का शुभ आरंभ पवित्र कुरान की आयत से कारी मोहम्मद जाकिर ने किया। जलसे को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद मौलाना उबैदुल्लाह आज़मी ने कहा कि जल्द ही एक ऐसा महीना आने वाला है। जो बुराइयों को अच्छाइयों में बदल देता है। इसलिए दिल खोलकर इस महीने का स्वागत करें। इस महीने में नमाज रोजे की ऐसी आदत डालिए कि साल भर तक कभी न छूटे। उन्होंने कहा कि जो नमाज रोजा छोड़कर मजारों पर फूल व चादर चढ़ाता है। नियाज़ फातिहा करता है, तो उसे कुछ भी फायदा न होगा। अल्लाह ताला ने मनुष्य को जरूरत और अक्ल दोनों दिया है। इसलिए वह अपनी जरूरत को पूरी करने में बुद्धि का सहारा ले। उन्होंने धार्मिक शिक्षा पर भी जोर दिया और कहा कि आप अपने बच्चों को दुनिया की शिक्षा दिलाएं। मगर उससे पहले धार्मिक शिक्षा अवश्य दिलाए। उन्होंने मौजूदा दिनों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की तरफ से उर्दू भाषा पर किए गए प्रहार और उर्दू पढ़ने वालों को कठमुल्ला कहने पर नाराजगी प्रकट किया। वक्फ बिल के बारे में उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने मस्जिद मदरसों के लिए जो जमीन वक्फ की है। उन्हें हड़पने की कोशिश की जा रही है। जोर देकर कहा कि हम इसे पास नहीं होने देंगे। इसके लिए हम हर संभव लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। अगर आंदोलन करना पड़ा तो हम आंदोलन भी करेंगे। कॉन्फ्रेंस में नातिया दौर भी चला। निम्नलिखित लाइनों की श्रोताओं ने खूब प्रशंसा की। अफजल इलाहाबादी ने पढ़ा –
वक्फ करता हूं मैं सदा के लिए, यह जुग मदहे मुस्तफा के लिए। शकील आरफी ने पढ़ा – जिसको मंजूर नहीं शेरे खुदा की खुशबू,
मिल नहीं सकती उसे सल्ले अला की खुशबू। इस वर्ष जामिया में १३ बच्चों ने हज और मौलवियत को पूर्ण किया। बच्चों के सरों पर दस्तार बाँधी गई।साथ ही भिन्न-भिन्न विषयों पर प्रतिस्पर्धा भी करायी गयी। प्रथम, द्वितीय, तृतीय आने वाले विद्यार्थियों को मेडल तथा प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। किरअत,  उर्दू तकरीर, अरबी तकरीर, अंग्रेजी तकरीर में प्रथम आने वाले विद्यार्थियों से किरअत व तकरीर कराई गई। प्रथम आने वाले विद्यार्थियों के नाम हसन रजा, मोहम्मद अफरोज, साकिब अहमद, हैदर अली है। आखिर में सलाम व दुआ के पश्चात जलसे का समापन किया हुआ। कार्यक्रम का संचालन शाहिद फर्रुखाबादी ने किया। इस अवसर पर विशेष तौर पर मौलाना हसन मियां, मौलाना अहमद हबीब, कारी अकबर एहसानी तथा जामिया के अध्यापक उपस्थित रहे। मदरसा के प्रधानाचार्य हाजी मोहम्मद इमरान साहब ने जलसे में आए हुए सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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Author: Kaushambi Sandesh

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