क्यों लगातार कम होती जा रही है भांग की सरकारी दुकानें भांग की आड़ में गांजा की सप्लाई कौशांबी के कुछ जगहों पर

आठ वर्ष पूर्व कौशांबी में चल रहे थे लगभाग 42 वर्तमान में है लगभग 27 सरकारी भांग के दुकानें

आबकारी विभाग के रहमो करम पर चल रहे है लगभग दो दर्जन से अधिक गांजे की दुकानें सुत्रों से पता चला

कौशाम्बी आबकारी विभाग में 8 वर्षों पहले लगभग 42 भाग के ठेके चलते थे लेकिन धीरे-धीरे भांग के ठेके कम होने लगे और वर्तमान में लगभग 27 भाग के ठेके चल रहे हैं कौन है वह मास्टरमाइंड जो सरकार की रकम डकार रहा है सवाल उठता है कि आखिर आबकारी विभाग के साठगांठ से कब तक भांग की बिक्री के आड़ में भ्रष्टाचार चलता रहेगा जिले में लगभग 25000 लोग प्रतिदिन गांजे का नशा करते हैं जिन्हें आसानी से गंजा उपलब्ध हो रहा है जब तक गाँजा बिक्री से भ्रष्टाचारी आजाद है। तब तक कौशांबी में गांजा बिक्री पर रोक लगती नहीं दिख रही है कौशांबी जिले में आबकारी विभाग भ्रष्टाचार की हर सीमा को लांघ चुका है भ्रष्टाचार कला में है कि भांग बेचने वाले ठेकेदार भांग की बिक्री से कई गुना अधिक सरकार को नीलामी की रकम दे रहे है इन भांग के ठेकेदारों के पास काली कमाई का क्या स्रोत है यह बड़ी जांच का विषय लेकिन आबकारी विभाग जांच करने को तैयार नहीं है जिले में मादक पदार्थों के तेजी से पांव पसारने के पीछे आबकारी विभाग भूमिका सवालों के घेरे में है आठ साल पहले लगभग 42 सरकारी भांग की दुकानें चलती थी।आज के समय में नामित केवल लगभग दो दर्जन से अधिक भांग की दुकानें है।जिसका पैसा सरकार के खाते में जाता है लेकिन लगभग 15 से 20 दुकानें ऐसी है जो विभाग के रहमो करम पर चल रही है और खुले आम गांजा की बिक्री हो रही है।
आखिर इन अवैध धंधा करने वालो पर आबकारी विभाग क्यों मेहरबान है।क्या इन दुकानों को चलाने वाले अपराधी नहीं है इन्हे क्यों छुट्टा छोड़ा गया है सुत्रों का कहना है आबकारी विभाग के रहमोकरम  पर पलने वाले इन अपराधियों पर कानून का हंटर विभाग कब चलवाएगा जिले में चल रहे अवैध दुकानों की पूरी लिस्ट जन-जन की जुबान में है लेकिन आबकारी विभाग अंजान बनने की कोशिश कर रहा है

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