छठे दिन भक्तों ने की कात्यायनी स्वरूप की पूजा,महर्षि कात्यायन के नाम से माता का नाम कात्यायनी पडा,कठोर तपस्या कर मां को पुत्री रूप म़े पाये थे महर्षि कात्यायन

छठे दिन भक्तों ने की कात्यायनी स्वरूप की पूजा,महर्षि कात्यायन के नाम से माता का नाम कात्यायनी पडा,कठोर तपस्या कर मां को पुत्री रूप म़े पाये थे महर्षि कात्यायन

कौशाम्बी संदेश आर्या शुक्ला जिला कार्यालय

कड़ा 51शाक्तिपीठ कडाधाम में नवरात्रि के छठे दिन भक्तों ने मां के छठवें स्वरूप की विधिवत पूजा पाठ की।पौराणिक मान्यता है कि एक प्रसिद्ध महर्षि ने जिनका नाम कात्यायन था,ने भगवती जगदम्बा को पुत्री के रूप में पाने की कठोर तपस्या की।

कई हजार सालो की कठिन तपस्या के बाद महर्षि कात्यायन के यहां देवी जगदम्बा ने पुत्री रूप में जन्म लिया और कात्यायनी कहलायी।ये बहुत ही गुणवती थी इनका प्रमुख गुण खोज करना था इसीलिए वैज्ञानिक युग में देवी कात्यायनी का सर्वाधिक महत्व हैं।मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी है।इस दिन साधक का आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है और आज्ञा चक्र में स्थित होने के कारण मां कात्यायनी के सहज रूप से दर्शन प्राप्त होते है।साधक इस लोक में रहते हुए अलौकिक तेज से युक्त रहता हैं।एक मान्यता यह भी है कि गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए देवी कात्यायनी की पूजा की थी साथ ही विवाह संबंधी मामलो के लिए इनकी पूजा सबसे अचूक मानी जाती है।इनकी पूजा से योग्य और मनचाहा पति की मनोकामनाएं पूरी होती है।ज्योतिष में बृहस्पति देव का सम्बंध मां कात्यायनी से माना जाता है।कडाधाम नवरात्रि मेला के छठे दिन हजारों की संख्या में श्रृध्दालू भक्त कडाधाम पहुंचे श्रृध्दालू भक्तों की सुरक्षा के लिये भारी संख्या मे पुलिस बल मौजूद रही।

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