नवरात्रि के प्रथम कड़ा धाम में श्रृद्धालू ने की मां शैलपुत्री स्वरूप की पूजा, श्रद्धालु भक्तों की दिखी भारी भीड़

नवरात्रि के प्रथम कड़ा धाम में श्रृद्धालू ने की मां शैलपुत्री स्वरूप की पूजा, श्रद्धालु भक्तों की दिखी भारी भीड़


कौशाम्बी संदेश आर्या शुक्ला

कौशाम्बी। 51 शक्तिपीठों में एक शक्तिपीठ कड़ा धाम में रविवार को नवरात्र के प्रथम दिन श्रद्धालु भक्तों की भारी भीड़ देखेगी सुबह से ही कड़ा धाम के विभिन्न घाटो- कुबरी घाट, कालेश्वर घाट,हनुमान घाट आदि घाटों पर श्रद्धालु भक्त स्नान करके हाथों में नारियल चुनरी लेकर का धाम पहुंचे और लाइनों में लगकर मां के दर्शन करते रहे। नवरात्रि के प्रथम दिन नौ देवियों में प्रथम शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पूर्व जन्म में शैलपुत्री का नाम सती था और यह भगवान शिव की पत्नी थी के पिता दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान कर दिया था अगले जन्म में यही सती शैलपुत्री स्वरूप में प्रकट हुई और भगवान शिव से इनका विवाह हुआ नवरात्रि में मां पुत्री की पूजा करने से जीवन के समस्त क्लेश और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है मां को पान के एक पत्ते पर लौंग सुपारी मिश्री रखकर मां शैलपुत्री को अर्पित करने से आपके जीवन में हर इच्छा पूर्ण हो जाती है ऐसा माना जाता है नवरात्रि के प्रथम उपासना में साधक अपने को मूलाधार चक्र में स्थापित करते हैं और अनेक सिद्धियों को सिद्ध करने का बड़ा ही शुभ दिन माना गया। मां शैलपुत्री को भोग के रूप में घी से बनी वस्तुएं अत्यंत परी है ऐसा माना जाता है कि घी से बने वस्तुओं को खासकर के गाय के घी व बादाम को मिलाकर के बने हलवे का भोग लगाने से मां अपने भक्तों पर विशेष कृपा करती है साथ ही साथ मां अपने भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते है इनकी पूजा में गुड़हल का फूल व कनेर का फूल का बहुत ही विशेष महत्व है। कडा़ धाम में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा जगह-जगह बैरिकेडिंग कराई गई थी ताकि दर्शन करने वाले श्रद्धालु भक्तों को कोई असुविधा का सामना न करना पड़े वही मंदिर प्रांगण में भी पुलिस प्रशासन श्रद्धालु भक्तों की सुविधा के लिए चप्पे चप्पे पर मौजूद रही। नवरात्रि के प्रथम दिन भीड़ को देखते हुए अचानक सीओ अवधेश विश्वकर्मा कड़ा धाम मेले का निरीक्षण करने पहुंचे जहां उन्होंने सभी पुलिस कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।इसके साथ ही कड़ा धाम थाना अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह फोर्स समय-समय पर मेले का निरीक्षण करते रहे।

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