धर्म की रक्षा के लिए एकजुट हो हिंदू समाज

धर्म की रक्षा के लिए एकजुट हो हिंदू समाज

जनपद के सभी प्रखंडों में मनाया गया हिंदू स्थापना दिवस
कौशांबी संदेश।
भारत के सभी मताबलंवियों को एकजुट करने के लिए वर्ष 1964 में विश्व हिंदू परिषद का गठन किया गया। सोमवार को जनपद के सभी प्रखंडों में हिंदू संगठन द्वारा स्थापना दिवस मनाया गया

जिसके माध्यम से विश्व हिंदू परिषद संगठन के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने हिंदू को संगठित करने व धर्म की रक्षा करने के लिए संकल्प लिया। कारी के एक गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए काशी प्रांत के अध्यक्ष केपी सिंह ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना 1964 में हुई। इसके संस्थापकों में स्वामी चिन्मयानंद, एसएस आपटे, मास्टर तारा सिंह थे। पहली बार 21 मई 1964 में मुंबई के संदीपनी साधनाशाला में एक सम्मेलन हुआ। सम्मेलन आरएसएस सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर ने बुलाई थी। इस सम्मेलन में हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध के कई प्रतिनिधि मौजूद थे। सम्मेलन में गोलवलकर ने कहा कि भारत के सभी मताबलंवियों को एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिंदू , हिन्दुस्तानियों के लिए प्रयुक्त होने वाला शब्द है और यह धर्मों से ऊपर है।
सम्मेलन में तय हुआ कि प्रस्तावित संगठन का नाम “विश्व हिंदू परिषद्” होगा। 1966 के प्रयाग के कुंभ मेले में एक विश्व सम्मेलन के साथ ही इस संगठन का स्वरूप सामने आया। आगे यह फैसला किया गया कि यह गैर-राजनीतिक संगठन होगा और राजनीतिक पार्टी का अधिकारी विश्व हिंदू परिषद का अधिकारी नहीं होगा। संगठन के उद्देश्य और लक्ष्य कुछ इस तरह तय किए गए
हिंदू समाज को मजबूत करना
हिंदू जीवन दर्शन और आध्यात्म की रक्षा, संवर्द्धन और प्रचार
विदेशों में रहनेवाले हिंदुओं से तालमेल रखना, हिंदू और हिंदुत्व की रक्षा के लिए संगठन को मजबूत करना है। अजय पांडे विभाग अध्यक्ष प्रयागराज विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि हिंदू समाज के लोगों को संगठित होने की जरूरत है यदि हम संगठित होंगे तभी भारत देश विश्व गुरु के रूप में स्थापित होगा कार्यक्रम का संचालन विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री नीलमणि ने किया कार्यक्रम में मुख्य रूप से राम अभिलाष, उमेश केसरवानी, रूपेंद्र शर्मा, नरेंद्र कुमार, समर बहादुर, राजेंद्र पाल , फूलचंद जगदीश, दीपक, विवेक जायसवाल जिला मीडिया प्रभारी शैलेंद्र द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

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