सराय अकील: बेसमेंट अस्पतालों का ‘मौत का खेल’, कब टूटेगा प्रशासन का मौन

कौशाम्बी संदेश

कौशाम्बी // दिल्ली में हुए हादसे ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है, लेकिन सराय अकील क़स्बे में बेसमेंट में चल रहे अस्पतालों पर अब भी प्रशासन की अनदेखी जारी है। यहां के अवैध अस्पताल मौत के जाल में तब्दील हो चुके हैं, और लोग प्रशासन से पूछ रहे हैं—आखिर कब होगी कार्रवाई?

अस्पताल या मौत का कुआंसराय अकील में कई अस्पताल बेसमेंट में चल रहे हैं, जहां न तो सुरक्षा के मानक पूरे होते हैं और न ही किसी आपातकालीन स्थिति से निपटने की व्यवस्था है। तंग गलिया, बिना वेंटिलेशन के कमरे, और आग बुझाने के साधनों की कमी—ये अस्पताल किसी बड़े हादसे को आमंत्रित कर रहे हैं। यहां इलाज कराने आने वाले मरीज अनजाने में अपने जीवन को खतरे में डाल रहे हैं।
प्रशासन की सुस्ती, जनता की चिंता
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार इन अस्पतालों की शिकायत की, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। क़स्बे के लोग लगातार डर और अनिश्चितता में जी रहे हैं, लेकिन प्रशासन अब तक जागा नहीं है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) संजय कुमार ने हाल ही में चरवा में बेसमेंट में चल रहे तीन अस्पतालों को सीज करने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि जनपद में सभी अवैध अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सराय अकील के अस्पतालों पर अभी भी कोई कार्यवाही होती नहीं दिख रही है।

जनता का सवाल: कब तक चलेगा यह खेल?

सराय अकील के लोग अब खुलेआम प्रशासन से पूछ रहे हैं, “आखिर कब तक इन अवैध अस्पतालों का यह खेल चलता रहेगा? कब तक जनता को मौत के कुएं में धकेला जाएगा?”

सीएमओ संजय कुमार का दावा है कि वे जिले में सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत कर रहे हैं ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। लेकिन, सराय अकील के हालात देखकर लगता है कि यहां की प्रशासनिक मशीनरी अभी भी सुस्त पड़ी है।

प्रशासन को चेतावनी, जनता की मांग

अब समय आ गया है कि प्रशासन सराय अकील में चल रहे इन अवैध अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, और इस जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने का मतलब है, किसी बड़े हादसे का इंतजार करना ।

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