लमही में देर रात तक चली साहित्यिक काव्य गोष्ठी

वाराणसी में मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली पर आयोजित काव्य संध्या में शिक्षकों की शानदार प्रस्तुति

कौशाम्बी। राज्य हिंदी संस्थान वाराणसी में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से कार्यशाला हेतु प्रतिभाग करने गए शिक्षकों ने देर शाम उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही गांव में उनके स्मारक स्थल पर आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में प्रतिभाग कर काव्य पाठ प्रस्तुत करके हिंदी साहित्य के प्रति अगाध प्रेम को कविताओं के माध्यम एक सूत्र में पिरोया। इस मौके पर शिक्षको ने कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद के केवल एक साहित्यकार के रूप में बल्कि शिक्षक व बेसिक शिक्षा विभाग में अधिकारी के पद पर भी अपनी सेवाओ को याद किया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण व उन्नाव की शिक्षिका अन्नपूर्णा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम संयोजक युवा कवि प्रशांत अवस्थी “प्रखर” ने आये अतिथिओं का स्वागत किया। तदोपरान्त मुरादाबाद के शिक्षक डॉ हरन्दन ने काव्य रूप में सबका अभिनंदन वंदन किया । मुरादाबाद के शिक्षक जितेंद्र कुमार “जौली” ने कवियों का लाइसेंस, झांसी के शिक्षक ओमप्रकाश साहू ने छात्र नामांकन जागरूक काव्य , इटावा की शिक्षिका सपना चौधरी ने नर-नारी की समानता ,मथुरा के शिक्षक तेजवीर सिंह ने देश प्रेम के प्रति अपना तेज, अलीगढ़ के मूलचंद ने शिक्षा का महत्व बताते हुई कविता के तालों ने सभी को एक जगह बांधे रखा। कौशांबी के व्योमेश मिश्रा ने लिखब अब हम,महोबा के बृज किशोर मिश्रा ने प्रभु वंदना, प्रतापगढ़ के जयराम पांडे ने सामाजिक समरसता, अलीगढ़ के एएमयू से डॉ जुल्फिकार ने आपसी भाईचारे पर काव्य पाठ करते हुए श्रोताओं का मन मोह लिया। मुरादाबाद से प्रदीप शर्मा ने श्रीमती जी, राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ हरनंदन प्रसाद ने संभ्रांत जेबकतरा कविता कर वाह वाही लूटी। कार्यक्रम के संयोजक व संचालक प्रशांत अवस्थी ने सफलता का संदेश देती हुई कविता पढ़ी। फर्रुखाबाद से राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका भारती मिश्रा ने स्त्री विमर्श की बेटियों को संदेश देती हुई कविता पढ़कर सभी को संदेश कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रेमचंद स्मारक न्यास लमही के अध्यक्ष सुरेश चंद्र दुबे ने मुंशी प्रेमचंद के जीवन, उनकी कृतियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि मुंशी प्रेमचंद ने अपने आसपास की घटनाओं को अपनी कलम से आवाज देने का काम किया। कार्यक्रम में शिक्षकों द्वारा दिए गए सम्मान से अभिभूत होकर जब उनकी आंखों से अश्रु छलक उठे तो सभी भावुक हो गए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. हरनंदन प्रसाद ने कार्य्रकम संयोजक प्रशांत अवस्थी सहित सभी का शिक्षको का आभार जताया। इस अवसर पर लम्ही गांव के लोगों ने श्रोताओं के रूप में उपस्थित रहकर शिक्षक कवियों का हौसला बढ़ाया।

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Author: Kaushambi Sandesh

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