भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित एक पत्र में स्वास्थ्य संबंधी कारणों और चिकित्सा सलाह का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत अपने इस्तीफे की घोषणा कीराष्ट्रपति मुर्मू को संबोधित अपने पत्र में जगदीप धनखड़ ने लिखा, ‘स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं.’
झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी कोरांव तहसील में 200 से अधिक झोलाछाप आखिर किसके इशारे पर चल रहा कार्य नब्ज देखने से पहले दो से तीन सौ रुपए देनी पड़ती है फीसजिलाधिकारी प्रयागराज एक नजर इधर भी *कौशाम्बी सन्देश बब्बन बागी* कोरांव तहसील जो जनपद से सुदुर व मध्य प्रदेश के बार्डर पर स्थित है। वर्तमान में इसकी संख्या 200 से पार की है,जो मरीजों के इलाज से पूर्व दो से तीन सौ रुपए फीस लेकर दवाओं की आजमाइश मरीजों पर करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि शूई व बोतल टांग कर लम्बा बिल वसूला करते हैं। पर यह कोई आम बात नहीं है स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने नाम न जाहिर करने पर बताया कि इसकी पूरी सूची सी एम ओ आफिस में कार्यरत बाबू पंकज पांडेय की देख रेख में फल फूल रहा है। और जिम्मेदार मौन है इस सम्बन्ध में पंकज पांडेय से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना ही बन्द कर दिया।जिसका खामियाजा गरीब बेसहारा मरीजों को करना पढ़ रहा है। इस सम्बन्ध में सी एम ओ प्रयागराज अरूण कुमार त्रिपाठी से बात करने पर बताया गया कि टीम गठित कर शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने गीता नर्सिंग होम में ही मिलती है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लिखित प्राइवेट दवाईयां लोगों की मानीं जाय तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रिश्ते में भाई ही चला रहा है मेडिकल स्टोरकौशाम्बी सन्देश बब्बन बागी प्रयागराज कोरांव कोरांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकार द्वारा दीं जा रही दवाएं नाकाफी साबित हो रही है। तभी तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक से लेकर महिला डाक्टर व डाक्टर तक बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों से दवाओं को खरीदने को बाध्य है।जिनकी कीमत 1500 से दो हजार के बीच होती है। जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य विभाग का स्टाप पूरी तरह से लिप्त है, और मोंटी रकम की वसूली भी की जा रही है। पर्चे के हिसाब से डाक्टरो को कमीशन दिया जाता है।हालांकि यह खेल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का लम्बे समय से चलता रहा।हद तों तब हो गई कि इन डाक्टरो द्वारा लिखीं गई दवा कोरांव के किसी मेडिकल स्टोरों पर नहीं उपलब्ध है। इस प्रकार देखा जाए तो खुलेआम मरिजो का शोषण किया जा रहा है। किन्तु स्थानीय प्रशासन मौन धारण कर बैठा है यदि औचक निरीक्षण किया गया तों दूध का दूध और पानी का पानी सामने ही नहीं आएगा बल्कि कलयुग के भगवान का असली चेहरा भी उजागर हो सकता है।