
कौशाम्बी संदेश अमित कुशवाहा
उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जनपद में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि लगभग 15 वर्ष पूर्व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (ACMO) के पद पर जनपद में तैनात अधिकारी आज भी अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ जिले में जमे हुए हैं। कभी नोडल अधिकारी तो कभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) प्रभारी बनकर उन्होंने जिले में मानो अपना एक मजबूत तंत्र स्थापित कर लिया है।
सूत्रों के अनुसार जिले में संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की अधिकांश योजनाओं के नोडल अधिकारी भी वही हैं। केंद्र व राज्य सरकार की स्वास्थ्य से जुड़ी लगभग सभी महत्वपूर्ण योजनाओं की जिम्मेदारी इन्हीं के पास है। निजी अस्पतालों की जांच, अवैध अस्पतालों व फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर है, लेकिन लंबे समय से एक ही जिले में तैनाती के चलते अब सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि 15 वर्षों की निरंतर तैनाती ने अधिकारी को “कंफर्ट जोन” में पहुंचा दिया है, जिसका सीधा असर योजनाओं की गति और गुणवत्ता पर पड़ रहा है। कई योजनाएं कागजों में तो सफल दिखती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
बताया जाता है कि इस मामले को लेकर शासन स्तर तक कई बार शिकायतें भी पहुंच चुकी हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि संबंधित अधिकारी का कई बार तबादला हुआ, लेकिन ऊपर से मिले कथित “आशीर्वाद” के चलते वे आज भी उसी जनपद में बने हुए हैं।अब सवाल यह उठता है कि क्या लंबे समय से एक ही जिले में जमे अधिकारी पर शासन कोई ठोस कार्रवाई करेगा, या फिर स्वास्थ्य विभाग का यह “मकड़जाल” यूं ही फैलता रहेगा। जिले की जनता जवाब का इंतजार कर रही है।

