
मकर संक्रांति पर्व पर श्रद्धालुओं परिक्रमा कर कमाया पुण्य
कौशांबी संदेश ब्यूरो शैलेंद्र द्विवेदी,
कौशाम्बी के प्रभास गिरी पर्वत पर मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ एकत्रित हुई। कुछ श्रद्धालुओं ने सुबह यमुना नदी में स्नान कर गिरिराज की परिक्रमा कर पर्वत पर बने मंदिर में पूजन अर्चन भी किया। पभोसा गांव में यमुना नदी के तट पर स्थित प्रभास गिरी पर्वत जैन और हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
जैन धर्म के छठवें तीर्थंकर से जुड़ी पावन भूमि जैन धर्म की मान्यताओं के अनुसार प्रभास गिरी पर्वत वह स्थान है, जहां छठवें तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु ने दीक्षा लेकर कठोर तपस्या कर ज्ञान प्राप्त किया था। इसी वजह इसी वजह से दिगंबर जैन समाज के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।पर्वत की चोटी तक पहुंचने के लिए लगभग 180 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। शिखर पर पहुंचने पर श्रद्धालुओं को प्राचीन जैन प्रतिमाओं के दर्शन होते हैं। यहां वर्तमान में सात जैन मंदिर और एक विशाल मान स्तंभ स्थापित है। मान्यता है कि मान स्तंभ के दर्शन से व्यक्ति के भीतर का अहंकार, क्रोध और नकारात्मक भाव समाप्त हो जाते हैं।
धार्मिक स्थल से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था
कौशांबी। स्थानीय जनश्रुतियों और परंपराओं के अनुसार यह क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की अंतिम लीलाओं से भी जुड़ा माना जाता है। इसी कारण यहां हिंदू श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। पर्वत और आसपास का क्षेत्र वर्षों से धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है।
पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षण
कौशांबी। प्रभास गिरी पर्वत प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। पर्वत की ऊंचाई से यमुना नदी का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों और श्रद्धालुओं दोनों को मानसिक शांति प्रदान करता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थल अब धीरे-धीरे एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक
कौशांबी। प्रभास गिरी पर्वत जैन और हिंदू परंपराओं के शांतिपूर्ण संगम का प्रतीक है। यह स्थल न केवल धार्मिक सद्भाव को दर्शाता है, बल्कि कौशाम्बी जिले की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को भी सशक्त करता है। मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाला मेला प्रभास गिरी पर्वत को श्रद्धा, भक्ति और आस्था के विराट केंद्र के रूप में स्थापित है।

