
शिक्षक नियुक्ति करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल
कौशाम्बी संदेश
कौशाम्बी। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के तमाम दावों के बीच हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिले के कई सरकारी विद्यालयों में अयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि ऐसे शिक्षक नियुक्त कर दिए गए हैं जिन्हें बुनियादी गणित तक का ज्ञान नहीं, जिससे गांव के गरीब परिवारों के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए शिक्षक नियुक्त किए जाते हैं, लेकिन यहां स्थिति यह है कि खुद शिक्षक ही पढ़ाने योग्य नहीं हैं। वेतन के नाम पर जहां शिक्षकों का भविष्य संवर रहा है, वहीं उनके द्वारा पढ़ाए जा रहे बच्चों का भविष्य लगातार बर्बाद हो रहा है।मामला मंझनपुर विकासखंड क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां नगर पालिका परिषद मंझनपुर अंतर्गत एक सरकारी विद्यालय में तैनात एक महिला शिक्षिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार शिक्षिका को 15 × 3 = 45 तक का सही उत्तर नहीं आता और वह बच्चों को 15 × 3 = 75 पढ़ा रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन्हें शुद्ध गणित का ज्ञान नहीं, वे शिक्षक कैसे बन गईं?
ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह की नियुक्तियों ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। चयन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और समिति की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। लोगों के बीच चर्चा है कि कहीं दबाव या लेन-देन (लिफाफा सिस्टम) के तहत तो इन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन गंभीर शिकायतों के बावजूद खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे संबंधित अधिकारियों की निष्ठा और निरीक्षण प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी शिक्षकों के साथ-साथ उन्हें नियुक्त करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो, ताकि सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था सुधर सके और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो।

